ये दिन भी गुजर जायेंगे, हर पल की तरह
दुखों का सामना कर इंसान, बनके तू पत्थर की तरहकुछ ही दिन रहेंगे ये गम, बारिश के मौसम की तरह
धैर्य न टूटने पाए तेरा, इस बादल की तरह
याद रख तू हमेशा...
ये दिन भी गुजर जायेंगे, हर पल की तरह
सुखों का तू भोग न कर, किसी कुसुम की तरह
रह हमेशा तैयार भूमि में, एक क्षत्रिय की तरह
लड़ना पड़ सकता है कभी भी तुझे, वीरो की तरह
पर ज़हन में रखना तू हमेशा...
ये दिन भी गुजर जायेंगे, हर पल की तरह
सपने देख सकता है तू, मधुबन की तरह
खोना मत कभी उसमे, भवरें की तरह
कब? कौन? सपना तोड़ दे, अपनों की तरह
याद तू रखना हमेशा...
ये दिन भी गुजर जायेंगे, हर पल की तरह ||
कवि- सुधीर पांडेय
Fabulous Kavita
ReplyDeleteNice poem with nice thought...
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ReplyDeleteThis is fantastic
ReplyDeletethanks a lot deepthi
Deletesuper...........
ReplyDeletethanks 261114
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