Wednesday, 23 August 2017

*काश मै परिंदा होता*

नादान न समझ जिंदगी, खुदखुशी करने वाले हम नहीं
हमने जीना उन परिंदो से सीखा है, जिन्हे कैद में रहना पसंद नहीं,

माना पागल है थोड़े, इरादे भी थोड़े कमजोर है

पर बिना किये कुछ कैसे चले जाये, जब जीने की इतनी होड़ है,

आज थोड़ा सा उदास, तो बहुत सारा परेशान हूँ

समस्याए तो मुझे भी है, कौन कहता है अभी " मै नादान हूँ",

काश हम भी खुले गगन के परिंदे होते

उड़ते आसमान में, कहीं और ख़ुशी से जी रहे होते,

धन-दौलत और किसी चीज़ से कोई मतलब न होता 
दिन में खाने की तलाश पर रात में चैन से सोता,

न होती उम्मीद किसी से, न मज़बूरियाँ कोई होती 

ख़ुशी से जीते हर पल, ये पलके गीली न होती, 

होते गर परिंदे हम इस अम्बर के, कुछ तो अच्छा होता 

संघर्ष का तो पता नहीं, पर जीने का खुद से तज़ुर्बा होता, 

परिंदो के जीवन से जुडी, बस इतनी ही है कहानी 

कितनी प्यारी होती है, इनकी छोटी सी ज़िंदगानी...




कवि- सुधीर पांडेय

Thursday, 27 July 2017

*ये दिन भी गुजर जायेंगे, हर पल की तरह*

ये दिन भी गुजर जायेंगे, हर पल की तरह
दुखों का सामना कर इंसान, बनके तू पत्थर की तरह
कुछ ही दिन रहेंगे ये गम, बारिश के मौसम की तरह
धैर्य न टूटने पाए तेरा, इस बादल की तरह

याद रख तू हमेशा...
ये दिन भी गुजर जायेंगे, हर पल की तरह

सुखों का तू भोग न कर, किसी कुसुम की तरह
रह हमेशा तैयार भूमि में, एक क्षत्रिय की तरह
लड़ना पड़ सकता है कभी भी तुझे, वीरो की तरह

पर ज़हन में रखना तू हमेशा...
ये दिन भी गुजर जायेंगे, हर पल की तरह

सपने देख सकता है तू, मधुबन की तरह
खोना मत कभी उसमे, भवरें की तरह
कब? कौन? सपना तोड़ दे, अपनों की तरह

याद तू रखना हमेशा...
ये दिन भी गुजर जायेंगे, हर पल की तरह ||




कवि- सुधीर पांडेय





KISMAT CONNECTION

Is Hatheli Me Sab Kuchh Hota Hai,
Koi Pata To Koi Khota Hai,
Azib Tarana Hai Kismat Ka Yahan,
Jinke Pass Hai Sab, Zamana Usi Ka Hota Hai.


Hamare Sapno Me Ek Khwab Hota Hai,
Koi Masiha To Koi Kharab Hota Hai,
Chalna Achchhe Se In Rasto Par,
Qki Jiski Hai Aukat Yahan, Sab Usi Ka Hota Hai..


Milega Kisko Kab? Ye Anzan Hota Hai,
Is Jeevan Me Kaun Aazad Hota Hai,
Rahta Hai Zindagi Me, Hasne-Rone Ka Karwa,
Kise Lagta Hai, Jeevan Me Sab Aasan Hota Hai...


Lakiro Se Jan Lena To Vaham Hota Hai,
Mehnat Se Badal Pana Bhi To Sach Hota Hai,
Nahi Bad Pa Raha Hai Wo Ab Bhi Aage,
Qki Use Apni Kismat Par Guman Hota Hai....





Poet- Sudheer Pandey